"यज्ञ-प्रार्थना" हे यज्ञरूप प्रभो हमारे, भाव उज्ज्वल कीजिए। छोड़ देवें छल कपट को मानसिक बल दीजिए॥१॥ वेद की बोलें ऋचाएं सत्य को धारण करें। हर्ष में हों मग्न सारे शोक सागर से तरें॥२॥ अश्वमेधादिक रचाएं यज्ञ पर उपकार को। धर्म मर्यादा चलाकर लाभ दें संसार को॥३॥ नित्य श्रध्दा भक्ति से यज्ञादि हम करते रहें। रोग पीड़ित विश्व के संताप सब हरते रहें॥४॥ भावना मिट जाये मन से पाप-अत्याचार की। कामनाएं पूर्ण होवें यज्ञ से नर नार की॥५॥ लाभकारी हो हवन हर प्राणधारी के लिए। वायु जल सर्वत्र हो शुभ गंध को धारण किए॥६॥ स्वार्थ भाव मिटे हमारा प्रेम पथ विस्तार हो। इदन्न मम का सार्थक प्रत्येक में व्यवहार हों ॥७॥ हाथ जोड़, झुकाए मस्तक, वंदना हम कर रहे। नाथ करुणा रूप करुणा आप की सब पर रहे॥८॥ हे पूजनीय प्रभो! हमारे, भाव उज्ज्वल कीजिए। छोड़ देवें छल कपट को मानसिक बल दीजिए॥ प्रचंड प्रज्ज्वलित हुई हे यज्ञ की अग्नि! तू मोक्ष के मार्ग में पहला पग है......... ॥ओ३म्॥
33 करोड़ या 33 कोटि देवता देवता कहते है देने वाले को हिन्दू धर्म को भ्रमित करने के लिए अक्सर देवताओं की संख्या 33 करोड़ बताई जाती रही है। धर्मग्रंथों ( वेद ) में देवताओं की 33 कोटी ब...
क्या है मनुवाद : जब हम बार-बार मनुवाद शब्द सुनते हैं तो हमारे मन में भी सवाल कौंधता है कि आखिर यह मनुवाद है क्या? महर्षि मनु मानव संविधान के प्रथम प्रवक्ता और आदि शासक माने जाते हैं। मनु की संतान होने के कारण ही मनुष्यों को मानव या मनुष्य कहा जाता है। अर्थात मनु की संतान ही मनुष्य है। सृष्टि के सभी प्राणियों में एकमात्र मनुष्य ही है जिसे विचारशक्ति प्राप्त है। मनु ने मनुस्मृति में समाज संचालन के लिए जो व्यवस्थाएं दी हैं, उसे ही सकारात्मक अर्थों में मनुवाद कहा जा सकता है। मनुस्मृति : समाज के संचालन के लिए जो व्यवस्थाएं दी हैं, उन सबका संग्रह मनुस्मृति में है। अर्थात मनुस्मृति मानव समाज का प्रथम संविधान है, न्याय व्यवस्था का शास्त्र है। यह वेदों के अनुकूल है। वेद की कानून व्यवस्था अथवा न्याय व्यवस्था को कर्तव्य व्यवस्था भी कहा गया है। उसी के आधार पर मनु ने सरल भाषा में मनुस्मृति का निर्माण किया। वैदिक दर्शन में संविधान या कानून का नाम ही धर्मशास्त्र है। महर्षि मनु कहते है- धर्मो रक्षति रक्षित:। अर्थात जो धर्म की रक्षा करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। यदि वर्तमान संदर्भ में कहें तो ज...
Comments
Post a Comment