गायत्री मंत्र
ओउम् भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।
तूने हमें उत्पन्न किया, पालन कर रहा है तू |
तुझसे ही पाते प्राण हम, दुखियों के कष्ट हरता है तू ||
तेरा महान तेज है, छाया हुआ सभी स्थान |
सृष्टि की वस्तु-वस्तु में, हो रहा तू विद्यमान ||
तेरा ही धरते ध्यान हम, मांगते हम तेरी दया |
ईश्वर हमारी बुद्धि को श्रेष्ठ मार्ग पर चला ||
#आर्यम्
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